Tuesday, December 4, 2007

TERI YAAD

Aaj teri tasveer bananey ki koshish ki hai...
kuch lakeeron ko milaney ki koshish ki hai...
kaee baar jod kar haathon ko apney...
ek chehra bananey ki koshish ki hai...

Band palkon mein basa kar rakha hai jisko...
aaj ussey dil key kaagaj pey beechaney ki koshish ki hai...
sapno key rangon sey sajaya hai issko...
aur apney gamoon ko bhulaney ki koshish ki hai...

Khadey hokar samney uskey...
useey apney tas-savur sey milaney ki koshish ki hai...
nahi janta hoon magar phir bhi muskurata hun main...
ki terey aaeney mein ubhar ti surat sey milaney ki koshish ki hai...

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© ABHISHEK KUMAR-(QAASID)

Tuesday, June 26, 2007

TADAP

ना तदपो और ना तदपाओ हूमें...
ज़माने की तरह भूल जाओ हूमें...
होगा क्या हनसिल तुझेय मेरी चाहत केय सिवा...
बस दूर हीं रहना...अब ना क़रीब बुलाओ मुझेय...

दल-दो बेड़ियन मेरे पाऊं में...
की तिराक उठ टेय हैं ये सुनतेय हीं नाम तेरा...
करूँ तो क्या करूँ अपनेय दीवानेय पान का...
अब तोह तू हीं बता की इस्स को अब्ब समझाओं कैसेय..

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© ABHISHEK KUMAR-(QAASID)

Monday, June 25, 2007

MERI ZINDAGI KA MATLAB HO... TUM

मार दो मुझको अगर यादों में हीं ज़िंदा रखना है मुझको...
की सोतेय हुआई काबर-गाह में तेरी यादों का सुकून तो मिलेगा मुझ को...
ना रहेगी कोई तमना मुझ में बाक़ी तब-तोह
बासस तेरी याद का तोहफ़ा तोह मिलेगा मुझ को...

अगर समझतेय हो मुझको काबिल तोड़ा..
दो बूँद गिरा देना अपनी पलकों सेय क़ब्र पैर मेरी...
ज़िंदा रहकर तोह रहा भटकता तेरी मुहबत को सनम...
शायद इनसेय हीं मारकर मितजाएगी प्यास मेरी....
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© ABHISHEK KUMAR-(QAASID)

TUM RAHO KUSH HARDUM

ना बदलेय हैं हम,...
और ना बदला है ये ज़माना...
ना हम चलेय पीछेय इसस्केय...
और ना हुआ ये हमारा दीवाना...

मगर ना समझना की हैं हम अकेले...
की रहूं में मिले कई दीवानेय मुझो...
कभी तन्हाइयों नेय निभाया साथ मेरा...
कभी तेरी बातों नेय सताया मुझको...

हैर क़दम पैर टेरेय ख़याल नेय हस्सया हूमें...
हैर हाल में रहेय मुस्कुरातेय तन्हा...
बस यही सूँच कर गाये बढ़टे क़दम अपनेय...
की कुशी रही होगी भर तेरा दामन बेपनाह.....
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© ABHISHEK KUMAR-(QAASID)

NAJANEY KYUN - II

नजानेय क्यूं
नजानेय क्यूं मेरी हैर रह मुदती है टेरेय अहसियानेय तक
नजानेय क्यूं मेरी हैर साँस जुड़ी है तेरी साँसों सेय...
नजानेय क्यूं हैर बात तेरी गूँजती है तेरी मेरे कानो में..
नजानेय क्यूं तू दूर हो कर भी मेरे पासस मेरे लगती है

संच कहता हूँ तू मेरी ज़िंदगई में है लहू बनकर
मेरी धड़कन की आवाज़ तू है
मेरे जहाँ में उत्तेय हैर उम्मीद का मसला तू है
तू है मेरी हैर रोज़ की तमना...

नजानेय क्यूं.... नजानेय क्यूं ... नजानेय क्यूं...
हैर सच....हैर तमना... हैर उम्मीद करती है सिर्फ़ एह सवाल मुझ सेय....
गर तू है शामिल मुझ में कुछ इस्स तरह...
तोह भी आज हम इस्स तरह जुड़ा क्यूं है _

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© ABHISHEK KUMAR-(QAASID)

NAJANEY KYUN

नजानेय क्यूं
नजानेय क्यूं...
जब भी तुझसेय दूर जनेय को क़दम बढ़ता हूँ...
आँखों में आशक़्क और दिल में दर्द को मौजूद पता हूँ...

हाँ है नही तुझ सेय कोई रिश्ता मेरा...
तेरी अब सेय है राह भी जुड़ा मुझ सेय....

मगर फिर भी तुझसेय नजनेऊ किस दोआर सेय...
ख़ुद को बँधा और मजबूर पता हूँ...

आज़मा लिए हुँनेय भी हैर मौक़ा-ए-मुमकिन तुझेय भूलने को...
बस किसी कोनेय सेय तुझेय-तेरी याद को मिटा नही पता हूँ...

कई सवाल पूछ टेय हैं ये तपकत्ेय आँसों मेरे मुझ सेय...
अब तोह मैं ख़ुद हीं एक सवाल सा हुआ जाता हूँ...

तेरी ख़ुश्बू को आज भी पता हूँ बसा मुझ में...
की इस्स कश्म-काश में मैं भी डूबा जाता हूँ...

अब बस ये इलत्ज़ा है तुझ सेय ज़ालिम...
अगर है तेरी तमना की चलती रहें संसेय मेरी...

जा छोड़ कर मुझ को इस्स तरह तू अपनेय आशियानेय में...
और ना आना फिर कभी मेरी जहाँ में...
की मैं भी चाहता हूँ जीना टेरेय बग़ैर...
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© ABHISHEK KUMAR-(QAASID)