Monday, June 25, 2007

TUM RAHO KUSH HARDUM

ना बदलेय हैं हम,...
और ना बदला है ये ज़माना...
ना हम चलेय पीछेय इसस्केय...
और ना हुआ ये हमारा दीवाना...

मगर ना समझना की हैं हम अकेले...
की रहूं में मिले कई दीवानेय मुझो...
कभी तन्हाइयों नेय निभाया साथ मेरा...
कभी तेरी बातों नेय सताया मुझको...

हैर क़दम पैर टेरेय ख़याल नेय हस्सया हूमें...
हैर हाल में रहेय मुस्कुरातेय तन्हा...
बस यही सूँच कर गाये बढ़टे क़दम अपनेय...
की कुशी रही होगी भर तेरा दामन बेपनाह.....
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© ABHISHEK KUMAR-(QAASID)

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