TADAP
ना तदपो और ना तदपाओ हूमें...
ज़माने की तरह भूल जाओ हूमें...
होगा क्या हनसिल तुझेय मेरी चाहत केय सिवा...
बस दूर हीं रहना...अब ना क़रीब बुलाओ मुझेय...
दल-दो बेड़ियन मेरे पाऊं में...
की तिराक उठ टेय हैं ये सुनतेय हीं नाम तेरा...
करूँ तो क्या करूँ अपनेय दीवानेय पान का...
अब तोह तू हीं बता की इस्स को अब्ब समझाओं कैसेय..
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© ABHISHEK KUMAR-(QAASID)